दिल्ली हाईकोर्ट: सरकारी वकीलों की नियुक्ति के लिए 3 महीने में बनाएं नियम (Guidelines)

दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

दिल्ली हाईकोर्ट का केंद्र को सख्त निर्देश: सरकारी वकीलों की नियुक्ति के लिए 3 महीने में बनाएं नियम, पारदर्शिता है जरूरी

(Delhi High Court Directs Centre To Frame Guidelines For Engagement Of Govt Counsel Within 3 Months)

दिनांक: 17 दिसंबर 2025

द्वारा: एडवोकेट सतीश लोधा


परिचय (Introduction)

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका (PIL) का निपटारा करते हुए केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह सरकारी वकीलों (Government Counsels) की नियुक्ति और पैनल तैयार करने (Empanelment) के लिए 3 महीने के भीतर स्पष्ट और पारदर्शी दिशानिर्देश (Guidelines) तैयार करे। कोर्ट ने यह सुनिश्चित करने को कहा है कि सरकारी वकीलों की नियुक्ति मनमाने ढंग से न होकर योग्यता के आधार पर होनी चाहिए।


मामला क्या था? (Background of the Case)

यह मामला एक जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा है, जिसे विशाल शर्मा नामक याचिकाकर्ता ने दायर किया था।

  1. चुनौती (Challenge): याचिकाकर्ता ने केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली हाईकोर्ट और निचली अदालतों में मुकदमों की पैरवी के लिए नियुक्त किए गए वकीलों के पैनल को चुनौती दी थी।

  2. गंभीर आरोप (Key Allegations):

    • याचिका में दावा किया गया कि सितंबर 2025 में जारी वकीलों की सूची में कई ऐसे नाम थे, जिन्होंने ‘All India Bar Examination’ (AIBE) भी पास नहीं किया था।

    • कुछ वकीलों के ‘एनरोलमेंट नंबर’ जैसी बुनियादी जानकारी भी रिकॉर्ड में नहीं थी।

    • नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता (Transparency) की भारी कमी थी और यह पूरी तरह से “Pick and Choose” (अपनी मर्जी से चुनने) की नीति पर चल रही थी।


कोर्ट में क्या हुआ? (Court Proceedings)

मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस और उनकी बेंच के समक्ष हुई।

  • याचिकाकर्ता की दलील: उन्होंने तर्क दिया कि सरकारी वकीलों का पद एक सार्वजनिक पद (Public Office) की तरह है। इसलिए, इसकी नियुक्ति प्रक्रिया में संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का पालन होना चाहिए। योग्य वकीलों को मौका मिलना चाहिए, न कि केवल राजनीतिक या व्यक्तिगत संपर्कों वाले लोगों को।

  • सरकार का पक्ष: सॉलिसिटर जनरल (Solicitor General) तुषार मेहता ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कहा कि सरकार मौजूदा प्रक्रिया की समीक्षा करेगी और एक उचित तंत्र (Mechanism) विकसित करेगी।


फैसला और निर्देश (The Verdict & Directions)

कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल के बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए याचिका का निपटारा किया और निम्नलिखित निर्देश दिए:

  1. 3 महीने का समय: केंद्र सरकार को 3 महीने के भीतर वकीलों की नियुक्ति (Engagement/Empanelment) के लिए एक विस्तृत नीति या नियम बनाने होंगे।

  2. योग्यता और पारदर्शिता: नई नीति में यह सुनिश्चित करना होगा कि नियुक्तियाँ केवल योग्यता (Merit) के आधार पर हों और प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो।

  3. पुनर्विचार: सरकार को उन मौजूदा नियुक्तियों पर भी विचार करना चाहिए जिन पर याचिका में सवाल उठाए गए थे (जैसे बिना AIBE पास वाले वकील)।


कानूनी विश्लेषण (Legal Analysis)

यह फैसला कानूनी बिरादरी (Legal Fraternity) के लिए एक बड़ी जीत है।

  • समान अवसर: अब तक सरकारी पैनल में शामिल होना कई बार केवल ‘नेटवर्किंग’ का खेल माना जाता था। इस आदेश के बाद, एक निर्धारित प्रक्रिया (जैसे आवेदन मंगाना, इंटरव्यू, अनुभव की जाँच) शुरू होने की उम्मीद है।

  • गुणवत्ता में सुधार: जब वकील योग्यता के आधार पर चुने जाएंगे, तो अदालतों में सरकार का पक्ष और मजबूती से रखा जाएगा, जिससे न्याय प्रक्रिया तेज होगी।


निष्कर्ष (Conclusion)

दिल्ली हाईकोर्ट का यह आदेश स्पष्ट करता है कि सार्वजनिक धन से भुगतान पाने वाले वकीलों की नियुक्ति प्रक्रिया में मनमानापन नहीं चल सकता। अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार पर हैं कि वह अगले 3 महीनों में क्या नई पॉलिसी लेकर आती है। और अधिक कानूनी अपडेट्स और केस लॉज के लिए विजिट करें:https://livelawcompany.com/

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  • नोट: यह जानकारी कानूनी जागरूकता के उद्देश्य से है। किसी भी कानूनी कार्यवाही के लिए अपने वकील से सलाह लें।

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