Supreme Court Split Verdict 2025

Supreme Court Split Verdicts 2025 (सुप्रीम कोर्ट का खंडित फैसला)

जब सुप्रीम कोर्ट के जज भी नहीं हो पाए एकमत: जानिए 2025 के सबसे बड़े Split Verdicts और उनका असर

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1. परिचय (Introduction):

दोस्तों, भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में 2025 एक ऐसा साल रहा जहाँ हमें सुप्रीम कोर्ट में कई अहम मामलों पर Split Verdicts (खंडित फैसले) देखने को मिले। जब किसी केस की सुनवाई कर रही 2 जजों की बेंच में दोनों जजों की राय एक-दूसरे से बिल्कुल अलग होती है, तो उसे ‘Split Verdict’ कहा जाता है। आम जनता के लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि जब देश की सबसे बड़ी अदालत के जज ही किसी मुद्दे पर सहमत नहीं होते, तो उस केस का क्या होता है?

2. मुख्य केस: ताहिर हुसैन बनाम स्टेट (Tahir Hussain Case – January 2025)

साल 2025 की शुरुआत में ही एक बड़ा High-Profile Split Verdict आया जो Justice Pankaj Mithal और Justice Ahsanuddin Amanullah की बेंच ने दिया।

  • मामला क्या था? यह मामला पूर्व AAP पार्षद ताहिर हुसैन की अंतरिम जमानत (Interim Bail) से जुड़ा था, जो दिल्ली दंगों (UAPA Case) के तहत जेल में थे। उन्होंने चुनाव प्रचार के लिए जमानत मांगी थी।

  • जजों की अलग-अलग राय (Conflict):

    • Justice Ahsanuddin Amanullah का मानना था कि आरोपी 5 साल से जेल में है और उसे चुनाव लड़ने/प्रचार करने का अधिकार मिलना चाहिए, इसलिए उन्होंने जमानत देने के पक्ष में फैसला दिया।

    • Justice Pankaj Mithal ने इसका कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि ऐसे गंभीर अपराधों में चुनाव के लिए जमानत देना एक गलत नज़ीर (Precedent) पेश करेगा और इसे “Pandora’s Box” खोलने जैसा बताया।

  • परिणाम (Outcome): चूँकि दोनों जजों की राय अलग थी, इसलिए यह Supreme Court Judgment 2025 का मामला 3 जजों की बड़ी बेंच (Larger Bench) को भेजा गया, जहाँ बाद में उन्हें कुछ शर्तों के साथ ‘कस्टडी पैरोल’ दी गई।

3. दूसरा अहम मामला: माफीनामा केस (Apology Case – April 2025)

अप्रैल 2025 में, Justice Bela M. Trivedi और Justice Satish Chandra Sharma की बेंच के सामने वकीलों द्वारा बिना शर्त माफी (Unconditional Apology) मांगने का मामला आया।

  • Split Decision:

    • Justice Satish Chandra Sharma ने वकीलों की माफी स्वीकार कर ली और मामला रफा-दफा करने की बात कही।

    • लेकिन Justice Bela M. Trivedi ने सख्त रुख अपनाते हुए माफी स्वीकार करने से इनकार कर दिया और कहा कि कोर्ट की अवमानना (Contempt of Court) को हल्के में नहीं लिया जा सकता।

  • यह केस दिखाता है कि Legal Discipline को लेकर जजों के नजरिए में कितना अंतर हो सकता है।

4. कानूनी प्रक्रिया: Split Verdict के बाद क्या होता है? (Legal Procedure)

जब भी Supreme Court Split Verdict आता है, तो मामला भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के पास जाता है।

  • CJI इस केस को एक Larger Bench (3 या 5 जजों की बेंच) को सौंपते हैं।

  • बड़ी बेंच मामले को नए सिरे से सुनती है और बहुमत (Majority) के आधार पर फैसला देती है।

  • Section 17A PC Act (चंद्रबाबू नायडू केस) और Hijab Ban Case भी इतिहास में ऐसे ही बड़े उदाहरण रहे हैं।


निष्कर्ष (Conclusion):

2025 के ये फैसले साबित करते हैं कि कानून सिर्फ काले और सफेद में नहीं होता, उसके कई पहलू होते हैं। एक जागरूक नागरिक और कानून के छात्र के रूप में आपको Latest Legal News Hindi पर नजर रखनी चाहिए ताकि आप इन बारीकियों को समझ सकें।


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