(498A)क्या पति माता-पिता को पैसे भेज सकता है? जानिये सुप्रीम कोर्ट का नया 498A फैसला

क्या पति माता-पिता को पैसे भेज सकता है? जानिये सुप्रीम कोर्ट का नया 498A फैसला

केस का नाम: बेलीडे स्वागत कुमार बनाम तेलंगाना राज्य और अन्य (2025)

(Belide Swagath Kumar vs. State of Telangana & Another)

यह सुप्रीम कोर्ट का एक ऐतिहासिक फैसला है जो पतियों और उनके परिवारों के लिए बहुत राहत लेकर आया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि माता-पिता की देखभाल करना कोई अपराध नहीं है।

1. केस का नाम और विवरण (Case Details)

  • केस का नाम: Belide Swagath Kumar vs. State of Telangana & Another (2025)

  • फैसले की तारीख: 19 दिसंबर, 2025

  • बेंच (जज): जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन

  • फैसला: सुप्रीम कोर्ट ने पति के खिलाफ दर्ज IPC धारा 498A की FIR और चार्जशीट को रद्द (Quash) कर दिया।


2. लागू कानूनी धाराएं (Legal Sections Involved)

इस मामले में पुलिस ने पति और उसके परिवार पर निम्नलिखित धाराओं के तहत केस दर्ज किया था:
  • आईपीसी की धारा 498A (IPC Section 498A):

    यह धारा तब लगाई जाती है जब किसी विवाहित महिला के साथ उसका पति या पति के रिश्तेदार ‘क्रूरता’ (मारपीट या मानसिक प्रताड़ना) करते हैं।

  • दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 (Dowry Prohibition Act):

    यह कानून दहेज लेने या दहेज की मांग करने के खिलाफ है।


2. मामले के मुख्य तथ्य (Facts of the Case)

यह मामला एक ऐसे दंपत्ति (पति-पत्नी) का था जो अमेरिका (USA) में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम करते थे।

  • पत्नी का आरोप: पत्नी ने पति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई और कहा कि उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित (Mental Harassment) किया जा रहा है। उसके दो मुख्य आरोप थे:

    1. हिसाब मांगना: पति ने उसे घर के खर्चों का हिसाब रखने के लिए एक ‘एक्सेल शीट’ (Excel Sheet) बनाने को कहा, जिसे पत्नी ने दबाव बनाना बताया।

    2. माता-पिता को पैसे भेजना: पति अपनी कमाई का एक हिस्सा भारत में रहने वाले अपने बुजुर्ग माता-पिता और भाई को भेजता था। पत्नी का कहना था कि इससे उस पर आर्थिक दबाव डाला जा रहा है।


3. सुप्रीम कोर्ट का फैसला (Supreme Court Judgment)

सुप्रीम कोर्ट की पीठ (जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन) ने पति के पक्ष में फैसला सुनाया और धारा 498A के केस को रद्द (Quash) कर दिया। कोर्ट ने जो कहा, वह बहुत महत्वपूर्ण है:

(क) माता-पिता को पैसे भेजना ‘क्रूरता’ नहीं है

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक बेटे का अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल करना उसका ‘पवित्र कर्तव्य’ (Pious Duty) है।

  • अगर कोई पति अपनी कमाई में से कुछ पैसे अपने माता-पिता या भाई-बहन को भेजता है, तो इसे पत्नी के प्रति ‘क्रूरता’ या अत्याचार नहीं माना जा सकता।

  • कोर्ट ने कहा कि माता-पिता की सेवा करना भारतीय संस्कृति का हिस्सा है और इसे अपराध नहीं बनाया जा सकता।

(ख) खर्च का हिसाब (Excel Sheet) मांगना सही है

कोर्ट ने पत्नी के इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि हिसाब मांगना क्रूरता है।

  • कोर्ट ने कहा कि अगर पति ने पत्नी से घर के खर्चों का प्रबंधन (Management) करने के लिए ‘एक्सेल शीट’ भरने को कहा, तो यह घर को सुचारू रूप से चलाने का एक तरीका है।

  • हिसाब-किताब रखना ‘दहेज प्रताड़ना’ की श्रेणी में नहीं आता।

(ग) कानून का गलत इस्तेमाल

कोर्ट ने टिप्पणी की कि आजकल धारा 498A का इस्तेमाल बदला लेने के हथियार के रूप में किया जा रहा है। वैवाहिक जीवन की छोटी-मोटी नोक-झोंक को बढ़ा-चढ़ाकर ‘अपराध’ नहीं बनाया जाना चाहिए।

Section 498A Misuse (धारा 498A का दुरुपयोग)


4. निष्कर्ष (Conclusion)

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि धारा 498A का इस्तेमाल तभी होना चाहिए जब वास्तव में कोई गंभीर अपराध हुआ हो।

  • पति द्वारा माता-पिता की आर्थिक मदद करना और घर का हिसाब रखना एक सामान्य बात है, अपराध नहीं।

  • इस फैसले के बाद, अब केवल “पैसे भेजने” या “हिसाब मांगने” जैसे कारणों पर पतियों के खिलाफ झूठे केस नहीं चल पाएंगे।


  • सुप्रीम कोर्ट: पति का माता-पिता को पैसे भेजना और पत्नी से खर्च का हिसाब मांगना ‘क्रूरता’ नहीं है। कोर्ट ने इसे पति का कर्तव्य बताकर 498A केस रद्द किया।
  • बड़ा फैसला: पति द्वारा माता-पिता की देखभाल करना ‘पवित्र कर्तव्य’ है। खर्च का हिसाब (Excel Sheet) मांगना अपराध नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने 498A केस खारिज किया।
  • सुप्रीम कोर्ट ने मानी पतियों की दलील: माता-पिता को पैसे भेजना और घर का हिसाब मांगना 498A के तहत अपराध नहीं। जानिये ऐतिहासिक फैसले की पूरी जानकारी।
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  • “सुप्रीम कोर्ट फैसला 2025: पति द्वारा माता-पिता को पैसे भेजना 498A नहीं – Belide Swagath Kumar Case”

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