Supreme Court का निर्देश: सभी कोर्ट्स और बार एसोसिएशन में Sexual Harassment कमेटियों (ICC) पर रिपोर्ट देनी होगी
- Supreme Court Judgment: अगर नियमों में स्पष्ट प्रावधान नहीं है, तो रिटायरमेंट के बाद कर्मचारी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं हो सकती
livelawcompany.com/disciplinary-action-retired-employee-supreme-court-hindiसुप्रीम कोर्ट ने पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज (PSUs) और सरकारी कर्मचारियों के पक्ष में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि एक बार जब कोई कर्मचारी सेवानिवृत्त (Retire) हो जाता है, तो नियोक्ता (Employer) उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई (Disciplinary Action) शुरू नहीं कर सकता, जब तक कि उस संगठन के सेवा नियमों (Service Rules) में इसकी स्पष्ट अनुमति न दी गई हो। यह फैसला उन हजारों कर्मचारियों के लिए राहत की खबर है जिन्हें रिटायरमेंट के बाद पुरानी गलतियों के लिए नोटिस भेजे जाते थे।
1. मास्टर और सर्वेंट का रिश्ता खत्म होना (End of Employer-Employee Relationship)
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का मुख्य आधार यह है कि रिटायरमेंट के साथ ही ‘नियोक्ता और कर्मचारी’ (Master and Servant) का रिश्ता खत्म हो जाता है। जब कोई व्यक्ति नौकरी में ही नहीं है, तो कंपनी का उस पर कोई प्रशासनिक नियंत्रण नहीं रहता। इसलिए, सामान्य नियम के तहत कंपनी उसके खिलाफ कोई विभागीय जांच (Departmental Inquiry) शुरू नहीं कर सकती। यह तभी संभव है जब कानून या कंपनी के नियम विशेष रूप से उस रिश्ते को ‘डीम्ड’ (Deemed) तौर पर जारी रखने की बात कहते हों।
2. नियमों में स्पष्टता अनिवार्य है (Express Provision in Rules)
कोर्ट ने कहा कि अगर कोई पब्लिक सेक्टर कंपनी किसी रिटायर हो चुके कर्मचारी पर कार्रवाई करना चाहती है, तो उसके सर्विस रूल्स में यह साफ-साफ लिखा होना चाहिए। “अंतर्निहित शक्ति” (Implied Power) के आधार पर कार्रवाई नहीं की जा सकती। उदाहरण के लिए, अगर नियमों में लिखा है कि “रिटायरमेंट के बाद भी 4 साल पुराने मामले खोले जा सकते हैं”, तभी जांच हो सकती है। अगर नियम चुप (Silent) हैं, तो जांच अवैध मानी जाएगी।
3. पेंशन और ग्रेच्युटी की सुरक्षा (Protection of Pension & Gratuity)
अक्सर देखा गया है कि विभाग रिटायरमेंट के बाद जांच शुरू करके कर्मचारी की ग्रेच्युटी या पेंशन रोक लेते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगाते हुए कहा कि ग्रेच्युटी और पेंशन कर्मचारी की मेहनत की कमाई है, कोई भीख नहीं। बिना किसी कानूनी अधिकार (Statutory Authority) के, केवल जांच शुरू करने के नाम पर इन लाभों को रोका नहीं जा सकता। अगर नियमों में “वित्तीय नुकसान की वसूली” का प्रावधान नहीं है, तो रिटायरमेंट के बाद पैसा नहीं काटा जा सकता।
4. पहले से चल रही जांच बनाम नई जांच (Pending vs. New Inquiry)
इस फैसले में एक और महत्वपूर्ण अंतर समझाया गया है। अगर कर्मचारी के रिटायर होने से पहले ही चार्जशीट दी जा चुकी थी और जांच चल रही थी, तो उसे रिटायरमेंट के बाद भी जारी रखा जा सकता है (अगर नियम अनुमति दें)। लेकिन, अगर कर्मचारी रिटायर हो चुका है और उसके बाद विभाग को याद आता है कि उसने कुछ गलत किया था, तो रिटायरमेंट के बाद नई जांच शुरू करना (Initiation of fresh inquiry) तब तक संभव नहीं है जब तक नियम इसकी इजाजत न दें।
5. फैसले का असर (Impact of the Verdict)
यह फैसला उन सभी सरकारी और अर्ध-सरकारी (PSU) कर्मचारियों के लिए एक सुरक्षा कवच है। अब अधिकारी अपनी मनमर्जी से रिटायर हो चुके कर्मचारियों को परेशान नहीं कर पाएंगे। कंपनियों को अब अपने एचआर (HR) नियमों में बदलाव करना होगा या फिर रिटायरमेंट से पहले ही कार्रवाई पूरी करनी होगी।
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला प्रशासनिक कानून (Service Jurisprudence) में पारदर्शिता लाता है। यह सुनिश्चित करता है कि एक कर्मचारी अपनी सेवा समाप्त करने के बाद सम्मानजनक जीवन जी सके और उसे बेवजह कानूनी पचड़ों में न फंसाया जाए, जब तक कि कानूनन ऐसा करना जरूरी न हो।
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