Supreme Court: ताइक्वांडो फेडरेशन ऑफ इंडिया को झटका, राष्ट्रीय संघ के रूप में कार्य करने पर रोक बरकरार
1. परिचय (Introduction)
खेल प्रशासन में गुटबाजी और राजनीति का खामियाजा अक्सर खिलाड़ियों को भुगतना पड़ता है। इसी संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ‘ताइक्वांडो फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (TFI) की याचिका को खारिज कर दिया है। TFI ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसे ‘राष्ट्रीय खेल महासंघ’ (National Sports Federation – NSF) के रूप में कार्य करने से रोक दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय स्पष्ट करता है कि जब तक किसी खेल निकाय की वैधता और मान्यता स्पष्ट नहीं हो जाती, उसे देश का प्रतिनिधित्व करने का अधिकार नहीं दिया जा सकता। यह फैसला खिलाड़ियों के हितों की रक्षा और खेल प्रशासन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में अहम है।
2. मामले की पृष्ठभूमि (Background of the Case)
यह विवाद भारत में ताइक्वांडो के प्रशासन पर नियंत्रण को लेकर है।
विवाद की जड़: भारत में ताइक्वांडो का संचालन करने का दावा करने वाले अलग-अलग गुटों के बीच लंबे समय से संघर्ष चल रहा है।
दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश: दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक आदेश पारित करते हुए ‘ताइक्वांडो फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (TFI) को भारत के आधिकारिक ‘राष्ट्रीय खेल महासंघ’ (NSF) के रूप में कार्य करने, टीम चयन करने या सरकारी धन का उपयोग करने से रोक दिया था। कोर्ट ने माना था कि यह मान्यता प्राप्त निकाय नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट में अपील: TFI ने इस रोक (Stay Order) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनका तर्क था कि वे ही असली शासी निकाय (Governing Body) हैं और हाई कोर्ट का आदेश उनके कामकाज को ठप कर रहा है।
3. सुप्रीम कोर्ट के मुख्य अवलोकन (Key Observations by SC)
न्यायमूर्ति सूर्य कांत (Justice Surya Kant) और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन (Justice K.V. Viswanathan) की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए निम्नलिखित दृष्टिकोण अपनाया:
A. हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप नहीं (No Interference) सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश एक ‘अंतरिम आदेश’ (Interim Order) है और मुख्य मामला अभी भी वहां लंबित है। शीर्ष अदालत आमतौर पर हाई कोर्ट के अंतरिम फैसलों में तब तक हस्तक्षेप नहीं करती जब तक कि कोई घोर अन्याय न हो रहा हो।
B. खिलाड़ियों का हित सर्वोपरि (Athlete Welfare First) अदालत का मुख्य सरोकार यह था कि प्रशासनिक लड़ाई के कारण एथलीटों का नुकसान नहीं होना चाहिए। वर्तमान में, खेल मंत्रालय और भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) द्वारा समर्थित व्यवस्था (जैसे ‘इंडिया ताइक्वांडो’ या तदर्थ समिति) खिलाड़ियों का प्रबंधन कर रही है ताकि वे अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग ले सकें। TFI को अधिकार देने से भ्रम पैदा होगा।
C. मान्यता का मुद्दा (Issue of Recognition) कोर्ट ने पाया कि जब तक खेल मंत्रालय (MYAS) और IOA द्वारा TFI को विधिवत मान्यता नहीं दी जाती, तब तक वह खुद को राष्ट्रीय महासंघ घोषित करके कार्य नहीं कर सकता।
4. निर्णय और परिणाम (Decision & Outcome)
सुप्रीम कोर्ट ने TFI की याचिका को खारिज (Dismissed) कर दिया।
आदेश: कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा जो TFI को राष्ट्रीय महासंघ के रूप में कार्य करने से रोकता है।
निर्देश: सुप्रीम कोर्ट ने TFI को निर्देश दिया कि वे अपनी शिकायतों और सबूतों के साथ वापस दिल्ली हाई कोर्ट जाएं, जहां मुख्य केस चल रहा है। अंतिम फैसला वहीं होगा।
5. इस फैसले का प्रभाव (Impact of Judgment)
यह निर्णय भारतीय खेल जगत के लिए महत्वपूर्ण संकेत है:
समानांतर निकायों पर रोक: कोई भी निजी संस्था खुद को ‘फेडरेशन’ घोषित कर सत्ता नहीं हथिया सकती। उसे सरकारी मान्यता और खेल संहिता (Sports Code) का पालन करना होगा।
खिलाड़ियों को स्पष्टता: अब यह स्पष्ट है कि चयन और प्रतिनिधित्व के लिए एथलीटों को किस निकाय (IOA समर्थित समिति) से संपर्क करना है, जिससे असमंजस की स्थिति खत्म होगी।
प्रशासनिक सुधार: यह फैसला खेल निकायों में गुटबाजी (Factionalism) को हतोत्साहित करता है।
6. निष्कर्ष (Conclusion)
‘ताइक्वांडो फेडरेशन ऑफ इंडिया बनाम भारत संघ’ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यह सिद्ध कर दिया है कि “पद और शक्ति” से ज्यादा महत्वपूर्ण “प्रक्रिया और वैधता” है। TFI की याचिका खारिज होने से यह सुनिश्चित हो गया है कि खेल प्रशासन को नियमों के तहत ही चलना होगा। जब तक हाई कोर्ट अंतिम फैसला नहीं देता, तब तक TFI देश के ताइक्वांडो खेल का ‘बॉस’ बनकर कार्य नहीं कर सकता।
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