RTI पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

RTI पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोकायुक्त की स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट (SPE) को RTI कानून से पूरी तरह छूट नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने सूचना देने के पक्ष में फैसला सुनाया।

Supreme Court of India ने Special Police Establishment (SPE) vs. Kamta Prasad Mishra मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि मध्य प्रदेश लोकायुक्त संगठन की स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट (SPE) को केवल सरकारी अधिसूचना के आधार पर RTI कानून से पूरी तरह बाहर नहीं रखा जा सकता। 


मामला क्या था?

कमता प्रसाद मिश्रा, जो उस समय मध्य प्रदेश पुलिस में टाउन इंस्पेक्टर थे, उनके खिलाफ 2017 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत एक ट्रैप केस दर्ज किया गया था। बाद में उनके अभियोजन (Prosecution) की स्वीकृति (Sanction) दी गई। 

इसके बाद उन्होंने RTI के तहत यह जानकारी मांगी कि:

  • अभियोजन स्वीकृति कैसे दी गई?

  • निर्णय लेने की प्रक्रिया क्या थी?

  • लोकायुक्त और संबंधित विभागों के बीच क्या पत्राचार हुआ?

लेकिन SPE ने सूचना देने से इनकार कर दिया। 


सूचना देने से इनकार क्यों किया गया?

SPE ने दो मुख्य तर्क दिए:

  1. RTI Act की धारा 8(1)(h) के तहत जानकारी देने से जांच या अभियोजन प्रभावित हो सकता है।

  2. मध्य प्रदेश सरकार की 2011 की अधिसूचना के अनुसार लोकायुक्त SPE को RTI Act से छूट प्राप्त है। 


हाईकोर्ट ने क्या कहा?

Madhya Pradesh High Court ने कहा कि:

  • जांच पूरी हो चुकी है।

  • केवल जांच का हवाला देकर सूचना नहीं रोकी जा सकती।

  • आवेदक को मांगी गई जानकारी दी जानी चाहिए। 


सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला दिया?

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा और कहा कि:

  • लोकायुक्त SPE को “Intelligence and Security Organisation” नहीं माना जा सकता।

  • इसलिए RTI Act की धारा 24(4) के तहत इसे पूर्ण छूट नहीं दी जा सकती।

  • मध्य प्रदेश सरकार की 2011 की अधिसूचना कानून की भावना के अनुरूप नहीं थी।


कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि:

  • RTI कानून पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है।

  • भ्रष्टाचार की जांच करने वाली एजेंसी को केवल अधिसूचना जारी करके RTI से बाहर नहीं किया जा सकता।

  • राज्य सरकार को यह साबित करना होगा कि संबंधित संस्था वास्तव में “Intelligence and Security Organisation” है।


इस फैसले का महत्व

यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि:

1. RTI को मजबूती

सरकारी एजेंसियों की जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ेगी।

2. लोकायुक्त संस्थाओं पर प्रभाव

भविष्य में केवल अधिसूचना जारी करके जांच एजेंसियों को RTI से बाहर रखना आसान नहीं होगा।

3. भ्रष्टाचार मामलों में पारदर्शिता

अभियोजन स्वीकृति और प्रशासनिक निर्णयों से जुड़ी जानकारी मांगने का अधिकार मजबूत हुआ है।

4. राज्यों के लिए संदेश

राज्य सरकारें RTI Act की धारा 24 का मनमाने ढंग से उपयोग नहीं कर सकतीं। 


निष्कर्ष

Special Police Establishment vs. Kamta Prasad Mishra मामला RTI कानून और सरकारी पारदर्शिता से जुड़ा एक महत्वपूर्ण निर्णय है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि भ्रष्टाचार की जांच करने वाली एजेंसियों को बिना उचित कानूनी आधार के RTI Act से छूट नहीं दी जा सकती। यह फैसला नागरिकों के सूचना के अधिकार को और मजबूत करता है। 


सुप्रीम कोर्ट ने Special Police Establishment vs Kamta Prasad Mishra मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि लोकायुक्त SPE को RTI कानून से पूर्ण छूट नहीं दी जा सकती। जानिए पूरा मामला और कोर्ट की अहम टिप्पणियां।


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