Sonam Wangchuk Case: सुप्रीम कोर्ट में सिब्बल की दलील- डीएम ने बिना दिमाग लगाए एसएसपी की रिपोर्ट को 'कॉपी-पेस्ट' किया
Sonam Wangchuk Detention Case: सुप्रीम कोर्ट में कपिल सिब्बल की दलील – “डीएम ने दिमाग नहीं लगाया, एसएसपी की सिफारिश को कॉपी-पेस्ट किया”
1. परिचय (Introduction)
लद्दाख के मशहूर पर्यावरणविद और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक की हिरासत (Detention) का मामला अब सुप्रीम कोर्ट में एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है। वांगचुक, जिन्हें सितंबर 2025 में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था, उनकी रिहाई के लिए उनकी पत्नी ने याचिका दायर की है। हाल ही में हुई सुनवाई में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने प्रशासन की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कोर्ट को बताया कि वांगचुक को हिरासत में लेने का आदेश बिना सोचे-समझे (Non-application of mind) दिया गया था, क्योंकि डीएम (District Magistrate) ने एसएसपी (SSP) की रिपोर्ट को सिर्फ ‘कॉपी-पेस्ट’ कर दिया। यह मामला अब व्यक्तिगत स्वतंत्रता और प्रशासनिक शक्तियों के दुरुपयोग की एक बड़ी बहस बन चुका है।
2. “कॉपी-पेस्ट” वाला आदेश (The ‘Copy-Paste’ Argument)
कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट के सामने तर्क दिया कि किसी व्यक्ति को एनएसए (NSA) जैसे सख्त कानून के तहत हिरासत में लेने से पहले डीएम को अपनी खुद की संतुष्टि (Subjective Satisfaction) दर्ज करनी होती है। लेकिन इस मामले में, डीएम का आदेश और एसएसपी (लद्दाख) द्वारा दी गई सिफारिश शब्दशः एक जैसी (Verbatim) है। सिब्बल ने कहा, “आधार (Grounds) बिल्कुल वही हैं, शब्द वही हैं, यहां तक कि वाक्य भी वही हैं।” इसका मतलब है कि हिरासत में लेने वाले अधिकारी (Detaining Authority) ने अपना दिमाग नहीं लगाया, बल्कि पुलिस की रिपोर्ट पर आंख मूंदकर हस्ताक्षर कर दिए, जो कानूनी रूप से गलत है।
3. शांति की अपील वाला वीडियो छिपाया गया (Suppression of Peace Video)
सिब्बल ने कोर्ट को बताया कि प्रशासन ने वांगचुक के खिलाफ सबूत तो पेश किए, लेकिन वह सबूत छिपा लिया जो उनकी बेगुनाही साबित करता था। उन्होंने कोर्ट में एक वीडियो चलाया जिसमें सोनम वांगचुक लोगों से शांति बनाए रखने और हिंसा न करने की अपील कर रहे थे। सिब्बल का तर्क था कि यह “गांधीवादी सत्याग्रह” का वीडियो सबसे अहम और ताज़ा सबूत था, लेकिन इसे जानबूझकर रिकॉर्ड से हटा दिया गया ताकि उन्हें हिंसा भड़काने वाला बताया जा सके। सुप्रीम कोर्ट ने भी माना कि अगर अहम सबूत छिपाए गए हैं, तो हिरासत का आदेश रद्द हो सकता है।
4. सबूत नहीं दिए गए (Non-supply of Material)
आरोप है कि जिन 4 वीडियोज के आधार पर वांगचुक को हिरासत में लिया गया, वे उन्हें या उनके वकील को दिए ही नहीं गए। संविधान का अनुच्छेद 22 (Article 22) कहता है कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति को यह जानने का हक है कि उसे क्यों पकड़ा गया है, ताकि वह अपना बचाव (Representation) कर सके। सिब्बल ने कहा कि जब वीडियो ही नहीं दिए गए, तो वांगचुक अपना बचाव कैसे करते? प्रशासन ने जो पेन ड्राइव दी थी, उसमें वे वीडियो नहीं थे, जो वांगचुक के मौलिक अधिकारों का हनन है।
5. पुराने मामलों का सहारा (Reliance on Stale Grounds)
सिब्बल ने यह भी दलील दी कि हिरासत के आदेश में जिन घटनाओं का जिक्र है, उनमें से कई मार्च 2024 की हैं, जबकि हिरासत सितंबर 2025 में हुई। कानूनन, हिरासत का आधार “तात्कालिक” (Proximate) होना चाहिए। इतने पुराने मामलों को आधार बनाकर किसी को एनएसए में बंद नहीं किया जा सकता। इसके अलावा, कई वीडियोज में तो वांगचुक मौजूद भी नहीं हैं, फिर भी उन्हें उनके खिलाफ इस्तेमाल किया गया।
निष्कर्ष
यह मामला दिखाता है कि कैसे कभी-कभी प्रशासनिक अधिकारी प्रक्रियाओं का पालन किए बिना सख्त कानूनों का इस्तेमाल करते हैं। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां इस बात का संकेत हैं कि अगर प्रक्रियात्मक खामियां (Procedural Lapses) पाई गईं, तो सोनम वांगचुक की हिरासत को अवैध घोषित किया जा सकता है। यह केस भविष्य में प्रशासनिक जवाबदेही तय करने के लिए एक नजीर साबित हो सकता है।
महत्वपूर्ण जानकारी
क्या आप Preventive Detention Laws, Article 22, और NSA के तहत अपने अधिकारों के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं?
अभी विजिट करें: livelawcompany.com
हमारी वेबसाइट पर उपलब्ध है:
-
NSA & Detention Laws Simplified in Hindi
-
Supreme Court Case Analysis
-
Legal Rights Against Illegal Detention
livelawcompany.com – आपके अधिकारों का रक्षक।
-
Sonam Wangchuk Detention Case Supreme Court
-
Kapil Sibal Arguments Sonam Wangchuk
-
NSA Preventive Detention Rules Hindi
-
Non-application of Mind in Detention Order
-
Article 22 Rights of Detenu
Sonam Wangchuk Case: सुप्रीम कोर्ट में सिब्बल की दलील- डीएम ने बिना दिमाग लगाए एसएसपी की रिपोर्ट को ‘कॉपी-पेस्ट’ किया ,
“SC में कपिल सिब्बल: सोनम वांगचुक की हिरासत अवैध है क्योंकि डीएम ने एसएसपी की रिपोर्ट ‘कॉपी-पेस्ट’ की और शांति की अपील वाले वीडियो छिपाए।”