HC:RoR से नाम हटाने के लिए तहसीलदार के पास जाएं

HC: RoR से नाम हटाने के लिए तहसीलदार के पास जाएं

1. परिचय (Introduction)

HC: RoR से नाम हटाने के लिए तहसीलदार के पास जाएं:- जमीन-जायदाद के कागजों (RoR) में नाम चढ़ाना या हटवाना एक आम कानूनी प्रक्रिया है। कई बार लोग जल्दबाजी में इसके लिए सीधे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हैं। लेकिन उड़ीसा हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ कर दिया है कि ‘रिकॉर्ड ऑफ राइट्स’ से किसी मृतक का नाम हटाने के लिए रिट याचिका (Writ Petition) सही रास्ता नहीं है। कोर्ट ने कहा कि यह काम तहसीलदार के अधिकार क्षेत्र में आता है और इसके लिए जमीनी जांच जरूरी है। यह फैसला उन लोगों के लिए एक गाइडलाइन है जो सीधे कोर्ट पहुंचकर अपना समय बर्बाद करते हैं।“Land Record Correction: उड़ीसा हाई कोर्ट ने कहा- RoR से नाम हटाने के लिए रिट याचिका सही नहीं। तहसीलदार के पास जाएं। पूरी जानकारी हिंदी में।”HC: RoR से नाम हटाने के लिए तहसीलदार के पास जाएं ।  

2. मामला क्या था? (The Issue)

याचिकाकर्ता (Petitioner) ने उड़ीसा हाई कोर्ट में संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत एक रिट याचिका दायर की थी। उनकी मांग थी कि ‘रिकॉर्ड ऑफ राइट्स’ (खतौनी/अधिकार अभिलेख) से एक मृतक व्यक्ति का नाम हटा दिया जाए और वारिसों का नाम अपडेट किया जाए। याचिकाकर्ता का तर्क था कि चूंकि उस व्यक्ति की मृत्यु हो चुकी है, इसलिए सरकारी रिकॉर्ड में सुधार किया जाना चाहिए।

3. हाई कोर्ट का तर्क: यह तथ्यों का मामला है

हाई कोर्ट ने याचिका सुनने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी का नाम रिकॉर्ड से हटाना एक “तथ्यात्मक प्रश्न” (Question of Fact) है। इसके लिए यह साबित करना जरूरी है कि व्यक्ति की वास्तव में मौत हो चुकी है, मौत कब हुई, उसके कानूनी वारिस कौन हैं और जमीन पर अभी किसका कब्जा है। हाई कोर्ट रिट याचिका में गवाहों या सबूतों की गहराई से जांच (Field Enquiry) नहीं करता। यह काम निचली अदालतों या राजस्व अधिकारियों का है।

4. सही प्रक्रिया: तहसीलदार की भूमिका

कोर्ट ने कहा कि इस काम के लिए ‘ओडिशा सर्वे एंड सेटलमेंट एक्ट’ और म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) नियमों के तहत एक निर्धारित प्रक्रिया है। याचिकाकर्ता को सीधे हाई कोर्ट आने के बजाय संबंधित तहसीलदार (Tahasildar) के पास आवेदन करना चाहिए। तहसीलदार को अधिकार है कि वह:

  1. जमीनी स्तर पर जांच (Field Enquiry) करे।

  2. मृत्यु प्रमाण पत्र और वारिसान प्रमाण पत्र की जांच करे।

  3. पड़ोसियों या गवाहों से पूछताछ करे।

  4. उसके बाद ही रिकॉर्ड (RoR) में बदलाव का आदेश दे।

5. रिट याचिका का दायरा

कोर्ट ने समझाया कि रिट याचिका तब दायर की जाती है जब किसी के मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा हो या कानून की कोई बड़ी गलती हुई हो। राजस्व रिकॉर्ड में नाम सुधारने जैसे प्रशासनिक कार्यों के लिए रिट जूरिडिक्शन का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। अगर तहसीलदार कार्रवाई न करे या गलत आदेश दे, तब उसकी अपील की जा सकती है, लेकिन पहली सीढ़ी तहसीलदार ही है।


निष्कर्ष

उड़ीसा हाई कोर्ट का यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए महत्वपूर्ण है। यह स्पष्ट करता है कि हर छोटे विवाद के लिए हाई कोर्ट आने की जरूरत नहीं है। राजस्व विभाग के पास अपनी शक्तियां हैं और नागरिकों को पहले उनका उपयोग करना चाहिए।


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