Indian Governance: विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका
1. परिचय (Introduction)
भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, और इसकी शासन व्यवस्था (Governance System) एक विशाल और सुव्यवस्थित ढांचे पर टिकी है। भारतीय संविधान ने देश को चलाने के लिए शक्ति को किसी एक व्यक्ति या संस्था के हाथ में नहीं सौंपा, बल्कि इसे तीन प्रमुख अंगों—विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका—में बांटा है। एक जागरूक नागरिक या प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्र के रूप में, यह समझना बेहद जरूरी है कि संसद कानून कैसे बनाती है, सरकार उसे लागू कैसे करती है और कोर्ट उसकी रक्षा कैसे करता है। आइए, इस सिस्टम को विस्तार से समझते हैं।
2. शासन के तीन मुख्य स्तंभ (Three Pillars of Governance)
भारतीय शासन व्यवस्था मुख्य रूप से तीन अंगों के समन्वय से चलती है:
A. विधायिका (Legislature) – कानून बनाने वाली संस्था
इसका मुख्य काम देश के लिए कानून बनाना और पुराने कानूनों में संशोधन करना है।
केंद्र में (संसद): इसमें राष्ट्रपति, लोकसभा (लोगों का सदन) और राज्यसभा (राज्यों का सदन) शामिल हैं।
राज्य में (विधानमंडल): इसमें विधानसभा और विधान परिषद (कुछ राज्यों में) शामिल होती हैं।
काम: बजट पास करना, बिल पर बहस करना और जनहित में नीतियां बनाना।
B. कार्यपालिका (Executive) – कानून लागू करने वाली संस्था
विधायिका द्वारा बनाए गए कानूनों को जमीनी स्तर पर लागू करना इनका काम है।
राजनीतिक कार्यपालिका: प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और उनका मंत्रिमंडल (ये 5 साल के लिए चुने जाते हैं)।
स्थायी कार्यपालिका: IAS, IPS और अन्य सरकारी अधिकारी (Bureaucracy), जो रिटायरमेंट तक सेवा देते हैं।
काम: योजनाओं को जनता तक पहुंचाना और प्रशासन चलाना।
C. न्यायपालिका (Judiciary) – कानून की रक्षा करने वाली संस्था
यह एक स्वतंत्र संस्था है जो यह देखती है कि कानूनों का पालन हो रहा है या नहीं।
सुप्रीम कोर्ट: देश की सर्वोच्च अदालत।
हाई कोर्ट: राज्यों की सबसे बड़ी अदालत।
जिला अदालत: जिले स्तर पर।
काम: विवादों को सुलझाना, मौलिक अधिकारों की रक्षा करना और संविधान की व्याख्या करना।
3. संघीय ढांचा (Federal Structure)
भारत में ‘संघीय व्यवस्था’ है, जिसका मतलब है कि शक्तियां केंद्र और राज्यों के बीच बंटी हुई हैं।
संघ सूची (Union List): रक्षा, रेलवे, विदेश मामले (सिर्फ केंद्र कानून बना सकता है)।
राज्य सूची (State List): पुलिस, कृषि, स्वास्थ्य (सिर्फ राज्य कानून बना सकता है)।
समवर्ती सूची (Concurrent List): शिक्षा, वन (दोनों कानून बना सकते हैं)।
4. नियंत्रण और संतुलन (Checks and Balances)
संविधान ने ऐसी व्यवस्था की है कि कोई भी अंग तानाशाही न कर सके।
अगर संसद कोई गलत कानून बनाती है, तो न्यायपालिका उसे रद्द कर सकती है।
अगर कार्यपालिका (सरकार) ठीक से काम न करे, तो विधायिका (संसद) अविश्वास प्रस्ताव लाकर उसे हटा सकती है।
जजों को हटाने का अधिकार संसद के पास महाभियोग (Impeachment) के जरिए है।
निष्कर्ष
भारतीय शासन व्यवस्था “जनता का, जनता के लिए और जनता द्वारा” शासन के सिद्धांत पर चलती है। यह संतुलन और सहयोग का एक बेहतरीन उदाहरण है। संविधान इसका सर्वोच्च दस्तावेज है, जिसके दायरे में रहकर ही प्रधानमंत्री से लेकर पटवारी तक सभी को काम करना होता है।
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