Calcutta High Court का बड़ा फैसला: Expired Lease Deed का Arbitration Clause नई लीज बनवाने के लिए इस्तेमाल नहीं हो सकता। जानिए Section 11 के तहत कोर्ट ने क्या कहा और इसके क्या मायने हैं।

कलकत्ता उच्च न्यायालय: समाप्त लीज डीड (Expired Lease Deed) के आधार पर नई लीज के लिए मध्यस्थता खंड (Arbitration Clause) का उपयोग नहीं किया जा सकता

हाल ही में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है कि यदि कोई लीज डीड (Lease Deed) समाप्त (expire) हो चुकी है, तो उसके ‘आर्बिट्रेशन क्लॉज’ (Arbitration Clause) का इस्तेमाल ‘नई लीज’ बनवाने या निष्पादित (execute) करवाने के विवाद को सुलझाने के लिए नहीं किया जा सकता है।

1. केस का नाम और विवरण (Case Details)

  • कोर्ट: कलकत्ता उच्च न्यायालय (Calcutta High Court)

  • जज: न्यायमूर्ति अनिरुद्ध रॉय (Justice Aniruddha Roy)

  • फैसले की तारीख: 23 दिसंबर, 2025

  • याचिकाकर्ता: HDFC (जो लीज के नवीनीकरण/नई लीज की मांग कर रहा था)

2. मामले के तथ्य (Facts of the Case)

इस मामले में विवाद एक संपत्ति की लीज (किरायेदारी समझौते) को लेकर था।

  • लीज की समाप्ति: याचिकाकर्ता (HDFC) और संपत्ति के मालिक (Landlord) के बीच जो लीज डीड थी, वह समय पूरा होने पर समाप्त (Expired) हो चुकी थी।

  • नई लीज की मांग: याचिकाकर्ता चाहता था कि संपत्ति के लिए एक ‘नई लीज डीड’ (Fresh Lease Deed) बनाई जाए। उसने दावा किया कि दोनों पक्षों के बीच पत्राचार (correspondence) हुआ था, जिससे यह संकेत मिलता है कि नई लीज दी जानी चाहिए।

  • विवाद: जब संपत्ति के मालिक ने नई लीज डीड साइन करने से मना कर दिया, तो याचिकाकर्ता ने पुरानी (समाप्त हो चुकी) लीज डीड में मौजूद ‘आर्बिट्रेशन क्लॉज’ का हवाला देते हुए मामले को मध्यस्थता (Arbitration) के लिए भेजने की मांग की।

  • कोर्ट में अर्जी: याचिकाकर्ता ने आर्बिट्रेशन और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 11 (Section 11) के तहत हाई कोर्ट में अर्जी लगाई ताकि एक मध्यस्थ (Arbitrator) नियुक्त किया जा सके।

3. कानूनी मुद्दा (Legal Issue)

क्या एक समाप्त हो चुकी लीज डीड (Expired Lease Deed) का आर्बिट्रेशन क्लॉज उस विवाद को सुलझाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है जो उसी संपत्ति के लिए एक बिल्कुल नई लीज (Fresh Lease) बनाने से जुड़ा हो?

4. कोर्ट का फैसला (Judgment)

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने HDFC की अर्जी को खारिज (Dismiss) कर दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में निम्नलिखित महत्वपूर्ण बातें कहीं:

  • पुराना क्लॉज नई लीज पर लागू नहीं: कोर्ट ने कहा कि जिस लीज डीड की अवधि समाप्त हो चुकी है, उसका आर्बिट्रेशन क्लॉज केवल उस पुरानी लीज से जुड़े विवादों तक सीमित है। इसे एक “नई लीज” के गठन या निष्पादन के लिए जबरदस्ती लागू नहीं किया जा सकता।

  • स्वतंत्र समझौता नहीं: नई लीज बनाना एक नया अनुबंध (Contract) है। पुराने अनुबंध (जो खत्म हो चुका है) की शर्तों के आधार पर किसी को नया अनुबंध करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता, जब तक कि दोनों पक्ष सहमत न हों।

  • धारा 11 का दायरा: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा 11 के तहत मध्यस्थ (Arbitrator) की नियुक्ति तभी हो सकती है जब विवाद का संबंध उस समझौते से हो जिसमें आर्बिट्रेशन क्लॉज मौजूद है। चूँकि यहाँ विवाद ‘नई लीज’ बनाने का था (जो अभी अस्तित्व में ही नहीं आई), इसलिए पुराना क्लॉज यहाँ लागू नहीं होगा।

5. महत्वपूर्ण धारा (Important Section)

  • Section 11, Arbitration and Conciliation Act, 1996: यह धारा कोर्ट को किसी विवाद में मध्यस्थ (Arbitrator) नियुक्त करने की शक्ति देती है। लेकिन इस केस में कोर्ट ने नियुक्ति करने से मना कर दिया क्योंकि आर्बिट्रेशन समझौता ‘नई लीज’ के लिए वैध नहीं माना गया।


निष्कर्ष (Conclusion):

यह फैसला उन किरायेदारों और मकान मालिकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है जिनके लीज एग्रीमेंट खत्म हो चुके हैं। यह स्पष्ट करता है कि आप पुरानी लीज की शर्तों का सहारा लेकर जबरदस्ती ‘नई लीज’ की मांग आर्बिट्रेशन के जरिए नहीं कर सकते। इसके लिए दोनों पक्षों की नई सहमति जरूरी है।

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“कलकत्ता उच्च न्यायालय ने अपने हालिया फैसले में स्पष्ट किया है कि एक Expired Lease Deed में मौजूद Arbitration Clause का उपयोग Fresh Lease के निष्पादन (Execution) के लिए नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति अनिरुद्ध रॉय ने माना कि नई लीज की मांग एक स्वतंत्र अनुबंध का विषय है, जिसे पुराने समझौते के आधार पर Section 11 Arbitration Act के तहत थोपा नहीं जा सकता। इस महत्वपूर्ण निर्णय के तथ्य, कानूनी धाराएं और विस्तृत विश्लेषण हिंदी में यहाँ पढ़ें।”


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