Supreme Court का निर्देश: सभी कोर्ट्स और बार एसोसिएशन में Sexual Harassment कमेटियों (ICC) पर रिपोर्ट देनी होगी

Supreme Court का निर्देश: सभी कोर्ट्स और बार एसोसिएशन में Sexual Harassment कमेटियों (ICC) पर रिपोर्ट देनी होगी

Supreme Court का कड़ा निर्देश: सभी कोर्ट्स और बार एसोसिएशन में Sexual Harassment कमेटियों (ICC) पर रिपोर्ट देनी होगी

1. परिचय (Introduction)

न्याय के मंदिर कहे जाने वाले कोर्ट परिसर और वकीलों के चैंबर, क्या वहां काम करने वाली महिलाओं के लिए पूरी तरह सुरक्षित हैं? यह एक कड़वा सवाल है जिसका जवाब सुप्रीम कोर्ट ने अब सख्ती से मांगा है। कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न रोकने के लिए बने कानून (POSH Act, 2013) के बावजूद, कई कोर्ट्स और बार एसोसिएशन में आज भी शिकायत कमेटियां (ICC) मौजूद नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अब सभी हाई कोर्ट्स से इस पर जवाब तलब किया है। यह कदम न्यायपालिका के भीतर महिलाओं को सुरक्षित और भयमुक्त माहौल देने की दिशा में एक बड़ी पहल है।

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2. POSH Act और ICC का गठन अनिवार्य

सुप्रीम कोर्ट ने जोर देकर कहा कि ‘कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013′ (POSH Act) के तहत हर संस्था में एक ‘आंतरिक शिकायत समिति’ (Internal Complaints Committee – ICC) का होना अनिवार्य है। कोर्ट ने यह नोटिस किया कि कई जगह कमेटियां या तो बनी नहीं हैं या निष्क्रिय हैं। इसलिए, सुप्रीम कोर्ट ने यह डेटा मांगा है कि किन-किन कोर्ट परिसरों और ट्रिब्यूनल्स में ये कमेटियां पूरी तरह से काम कर रही हैं।

3. बार एसोसिएशन और वकील भी दायरे में

यह आदेश इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें सिर्फ कोर्ट के कर्मचारी नहीं, बल्कि वकीलों की संस्थाएं यानी Bar Associations भी शामिल हैं। अक्सर देखा गया है कि कोर्ट परिसर में महिला वकीलों या इंटर्न्स को उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है, लेकिन बार बॉडीज में शिकायत सुनने का कोई ठोस तंत्र (Mechanism) नहीं होता। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वकीलों के चैंबर और बार रूम भी ‘कार्यस्थल’ (Workplace) के दायरे में आते हैं, इसलिए वहां भी सुरक्षा का ढांचा होना जरूरी है।

4. ऑनलाइन डैशबोर्ड और रिपोर्टिंग

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि कमेटियों की जानकारी पारदर्शी होनी चाहिए। कोर्ट चाहता है कि सभी संबंधित संस्थान यह बताएं कि:

  1. क्या ICC का गठन हो चुका है?

  2. कमेटी के सदस्यों के नाम और संपर्क विवरण क्या सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित हैं?

  3. पिछले एक साल में कितनी शिकायतें आईं और उनका निपटारा कैसे हुआ?

    हाई कोर्ट्स को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे अपने राज्य के सभी जिला कोर्ट्स और ट्रिब्यूनल्स से यह डेटा इकट्ठा करके सुप्रीम कोर्ट को दें।

5. महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल बनाना लक्ष्य

इस आदेश का मुख्य उद्देश्य न्यायपालिका (Judiciary) में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना और उन्हें सुरक्षित माहौल देना है। कोर्ट का मानना है कि अगर न्याय देने वाली जगह पर ही महिलाएं सुरक्षित नहीं होंगी, तो समाज में क्या संदेश जाएगा? इसलिए, यह सुनिश्चित करना हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की जिम्मेदारी होगी कि POSH एक्ट के नियमों का पालन कड़ाई से हो।


निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश न्यायिक परिसरों को महिलाओं के लिए सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अब बार एसोसिएशन और ट्रिब्यूनल्स इस जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। उन्हें न केवल कमेटियां बनानी होंगी, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना होगा कि वे प्रभावी ढंग से काम करें।


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