“Business Law Round-Up 25 Dec 2025: IBC, Arbitration & Cheque Bounce Supreme Court Judgment Hindi”

         Business Law Daily Round-Up: 25 December 2025       

(IBC, चेक बाउंस और आर्बिट्रेशन पर सुप्रीम कोर्ट के बड़े फैसले)

नमस्कार दोस्तों! आज के इस लीगल अपडेट में हम कॉर्पोरेट जगत के उन तीन बड़े फैसलों पर बात करेंगे जो हर वकील, सीए (CA) और बिजनेस करने वाले व्यक्ति के लिए जानना बेहद जरूरी है। आज का हमारा मुख्य विषय है Business Law Round-Up 25 Dec 2025: IBC, Arbitration & Cheque Bounce Supreme Court Judgment Hindi, जिसमें हम कोर्ट द्वारा दी गई नई व्यवस्थाओं को सरल भाषा में समझेंगे।


1. दिवालियापन कानून (IBC): ‘क्लीन स्लेट’ सिद्धांत पर मुहर

सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर दिवालियापन और शोधन अक्षमता संहिता (IBC) को लेकर स्थिति स्पष्ट की है।

  • तथ्य (Facts): जब कोई नई कंपनी किसी डूबती हुई कंपनी को खरीद लेती है, तो अक्सर पुराने सरकारी विभाग (जैसे बिजली विभाग या टैक्स डिपार्टमेंट) नई कंपनी से पुराना बकाया मांगने लगते हैं।

  • कोर्ट का फैसला: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक बार NCLT (ट्रिब्यूनल) से रेजोल्यूशन प्लान पास हो गया, तो पुरानी कंपनी का पिछला सारा बकाया खत्म मान लिया जाएगा। इसे “Clean Slate Theory” कहते हैं।

  • कानूनी धारा: Section 31 of IBC Code

  • महत्व: यह फैसला Business Law Round-Up 25 Dec 2025: IBC, Arbitration & Cheque Bounce Supreme Court Judgment Hindi के तहत सबसे अहम है क्योंकि इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।


2. आर्बिट्रेशन एक्ट: कोर्ट फैसले में बदलाव नहीं कर सकता

व्यापारिक विवादों को निपटाने के लिए आर्बिट्रेशन (मध्यस्थता) का इस्तेमाल बढ़ रहा है, लेकिन कोर्ट के हस्तक्षेप पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाम लगाई है।

  • तथ्य (Facts): कई बार जब आर्बिट्रेटर कोई फैसला सुनाता है, तो पक्षकार हाई कोर्ट में अपील करते हैं कि मुआवजे की रकम को कम या ज्यादा किया जाए।

  • कोर्ट का फैसला: सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने स्पष्ट किया कि कोर्ट आर्बिट्रेशन अवार्ड को या तो पूरी तरह मान सकता है या पूरी तरह रद्द कर सकता है, लेकिन उसमें “संशोधन” (Modification) नहीं कर सकता।

  • कानूनी धारा: Section 34 of Arbitration and Conciliation Act, 1996


3. चेक बाउंस (NI Act): हर डायरेक्टर जिम्मेदार नहीं

चेक बाउंस के मामलों में अक्सर कंपनी के सभी डायरेक्टर्स को आरोपी बना दिया जाता है, चाहे उनका उस लेन-देन से कोई लेना-देना हो या नहीं।

  • तथ्य (Facts): सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चेक बाउंस के केस में केवल उन्हीं डायरेक्टर्स पर मुकदमा चलेगा जो चेक जारी करते समय कंपनी के “Day-to-Day Affairs” (रोजमर्रा के कामकाज) के लिए जिम्मेदार थे।

  • कोर्ट का फैसला: नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स (Non-Executive Directors) या स्वतंत्र निदेशकों को बिना ठोस सबूत के परेशान नहीं किया जा सकता।

  • कानूनी धारा: Section 138 & 141 of Negotiable Instruments Act

  • इस तरह के अपडेट्स आप हमारे विशेष बुलेटिन Business Law Round-Up 25 Dec 2025: IBC, Arbitration & Cheque Bounce Supreme Court Judgment Hindi में लगातार देख सकते हैं।

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