Specific Performance Decree: क्या देरी से डिक्री बेकार हो जाती है? सुप्रीम कोर्ट ने ‘श्रीमती रूपा’ केस में स्थिति साफ की।

यह सुप्रीम कोर्ट का एक बहुत ही महत्वपूर्ण फैसला है जो प्रॉपर्टी विवादों (Property Disputes) और स्पेसिफिक रिलीफ एक्ट (Specific Relief Act) से जुड़ा है। यह फैसला उन वादी (Plaintiff/खरीदार) के लिए राहत है जिनके पक्ष में कोर्ट का फैसला (Decree) आ चुका है, लेकिन पैसे जमा करने में थोड़ी देरी हो गई है।

Case-: पी. रवि बनाम पी.वी. चोपलन (2024)

(Case Title: P. Ravi vs. P.V. Choppalan)

(नोट: यह फैसला इसी सिद्धांत पर आधारित है जिसे सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में स्पष्ट किया है)

यह फैसला इस सवाल पर था कि: “अगर खरीदार कोर्ट द्वारा तय समय सीमा के भीतर बाकी पैसा (Balance Sale Consideration) जमा करने में देरी करता है, तो क्या कोर्ट का फैसला (Decree) बेकार (Inexecutable) हो जाएगा?”


1. मामले के तथ्य (Facts of the Case)

इस केस की कहानी कुछ इस प्रकार थी:

  • समझौता (Agreement): वादी (Plaintiff/खरीदार) और प्रतिवादी (Defendant/बेचने वाला) के बीच जमीन खरीदने का एग्रीमेंट हुआ।

  • विवाद और कोर्ट केस: बेचने वाला रजिस्ट्री करने से मुकर गया, तो खरीदार ने कोर्ट में ‘Specific Performance’ (विशिष्ट अनुपालन) का केस किया।

  • कोर्ट का फैसला (Decree): ट्रायल कोर्ट ने खरीदार के पक्ष में फैसला सुनाया और आदेश दिया कि खरीदार 3 महीने (या निश्चित समय) के भीतर बाकी पैसा कोर्ट में जमा करे और बेचने वाला रजिस्ट्री करे।

  • देरी (Delay): खरीदार ने तय समय के भीतर पैसा जमा नहीं किया। उसने बाद में पैसा जमा किया।

  • निष्पादन याचिका (Execution Petition): जब खरीदार ने फैसला लागू करवाने (Registry करवाने) के लिए अर्जी दी, तो बेचने वाले ने विरोध किया। उसका कहना था कि चूंकि खरीदार ने समय पर पैसा नहीं दिया, इसलिए अब यह डिक्री लागू नहीं की जा सकती (Inexecutable)।


2. महत्वपूर्ण कानूनी धाराएं (Important Legal Sections)

इस फैसले को समझने के लिए आपको Specific Relief Act, 1963 की यह धारा पता होनी चाहिए:

धारा 28 (Section 28 of Specific Relief Act):

  • यह धारा कहती है कि अगर डिक्री (फैसला) आने के बाद खरीदार तय समय में पैसा जमा नहीं करता है, तो बेचने वाला (Seller) उसी कोर्ट में आवेदन दे सकता है जिसने फैसला सुनाया था।

  • बेचने वाला कोर्ट से मांग कर सकता है कि अनुबंध को रद्द (Rescind) कर दिया जाए।

  • अगर बेचने वाला यह आवेदन नहीं देता है, तो कोर्ट देरी के बावजूद खरीदार को पैसा जमा करने की अनुमति दे सकता है।


3. सुप्रीम कोर्ट का फैसला (Supreme Court Judgment)

सुप्रीम कोर्ट ने बेचने वाले की दलील को खारिज कर दिया और खरीदार के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने निम्नलिखित नियम तय किए:

केवल देरी से डिक्री रद्द नहीं होती

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि वादी (Plaintiff) ने पैसा जमा करने में देरी की है, डिक्री अपने आप निष्पादन योग्य (Inexecutable) नहीं हो जाती।

धारा 28 का पालन जरूरी

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर खरीदार ने पैसा जमा नहीं किया, तो बेचने वाले (Judgment Debtor) को धारा 28 के तहत अनुबंध रद्द करवाने की अर्जी लगानी चाहिए थी।

  • इस केस में बेचने वाले ने अनुबंध रद्द करने की कोई अर्जी नहीं लगाई थी।

  • वह सिर्फ निष्पादन (Execution) के समय देरी का बहाना बना रहा था, जो कानूनन मान्य नहीं है।

निष्पादन न्यायालय की सीमा (Power of Execution Court)

कोर्ट ने कहा कि जो कोर्ट फैसले को लागू (Execute) कर रहा है, वह फैसले के पीछे नहीं जा सकता। जब तक मूल कोर्ट (Trial Court) धारा 28 के तहत अनुबंध रद्द नहीं करता, तब तक डिक्री जीवित रहती है और उसे लागू करना होगा।


4. निष्कर्ष (Conclusion)

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि “न्याय के हित में” देरी को माफ किया जा सकता है।

  • अगर बेचने वाले ने अनुबंध रद्द (Rescind) करने का कदम नहीं उठाया, तो वह बाद में यह नहीं कह सकता कि पैसा देर से मिला इसलिए मैं रजिस्ट्री नहीं करूँगा।

  • फैसला: खरीदार द्वारा देर से पैसा जमा करने के बावजूद डिक्री लागू रहेगी और बेचने वाले को रजिस्ट्री करनी पड़ेगी।

 

Advocate Note (वकीलों के लिए टिप):

इस फैसले से यह सीख मिलती है कि अगर आप प्रतिवादी (Seller) के वकील हैं और खरीदार पैसा जमा नहीं कर रहा है, तो तुरंत Section 28 Specific Relief Act के तहत अनुबंध रद्द करने की अर्जी लगाएँ। सिर्फ Execution का इंतजार न करें।

  • सुप्रीम कोर्ट प्रॉपर्टी फैसला, स्पेसिफिक रिलीफ एक्ट धारा 28, जमीन रजिस्ट्री विवाद, एग्रीमेंट रद्द नियम, कोर्ट डिक्री निष्पादन, प्रॉपर्टी बायर राइट्स।
  • Specific Performance Decree Execution, Supreme Court Judgment on Property Delay, Section 28 Specific Relief Act, Rescission of Contract, Property Law India 2025, Civil Appeal Property Dispute.

Visit Our Website: LiveLawCompany.com

 कानूनी सलाह और सुप्रीम कोर्ट के लेटेस्ट जजमेंट के लिए आज ही विजिट करें!

क्या आप भी प्रॉपर्टी विवाद, चेक बाउंस, या 498A जैसे मामलों में कानूनी जानकारी चाहते हैं?

LiveLawCompany.com पर आपको मिलेगा:

 Latest Supreme Court Judgments (हिंदी और अंग्रेजी में)

 Legal Drafts (एग्रीमेंट, नोटिस, और जवाब दावे के फॉर्मेट)

  • Free Legal News (सरल भाषा में कानून की समझ)

इस केस की पूरी कॉपी डाउनलोड करने के लिए नीचे क्लिक करें:

 [Download Judgment Copy – LiveLawCompany.com]

जुड़ें भारत के सबसे भरोसेमंद लीगल न्यूज़ पोर्टल से: Website: www.livelawcompany.com

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top