पटना हाईकोर्ट का अहम फैसला: सीमेंट की बिक्री में पैकिंग सामग्री उसका अभिन्न अंग है, अलग दर से टैक्स नहीं लग सकता

पटना हाईकोर्ट का अहम फैसला: सीमेंट की बिक्री में पैकिंग सामग्री उसका अभिन्न अंग है, अलग दर से टैक्स नहीं लग सकता

केस का नाम: एसीसी लिमिटेड बनाम बिहार राज्य

कोर्ट: पटना हाईकोर्ट

बेंच: जस्टिस बिबेक चौधरी और जस्टिस डॉ. अंशुमान

दिनांक: 17 दिसंबर 2025

मामले का पूरा विवरण

यह मामला टैक्स कानून और वस्तुओं की बिक्री के वर्गीकरण से जुड़ा है। पटना हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि जब सीमेंट जैसी कोई वस्तु बेची जाती है, तो उसकी पैकिंग (जैसे बोरा या बैग) को मुख्य उत्पाद से अलग नहीं माना जा सकता।

1. विवाद क्या था?

इस मामले में याचिकाकर्ता, सीमेंट निर्माता कंपनी एसीसी लिमिटेड (ACC Limited) थी। कंपनी सीमेंट बनाती और बेचती है। सीमेंट को पैक करने के लिए जूट की बोरियों (Gunny Bags) और प्लास्टिक के बैग (HDPE Bags) का इस्तेमाल किया जाता है।

टैक्स विभाग और कंपनी के बीच विवाद टैक्स की दर को लेकर था।

सीमेंट पर टैक्स की दर 11% थी।

जूट की बोरियों पर टैक्स की दर 4% थी।

प्लास्टिक बैग पर टैक्स की दर 7% थी।

कंपनी का तर्क था कि वह सीमेंट और पैकिंग सामग्री दोनों बेच रही है। इसलिए, उन्होंने अपने इनवॉइस (बिल) में सीमेंट और पैकिंग सामग्री की कीमत अलग-अलग दिखाई और पैकिंग सामग्री पर कम दर (4% या 7%) से टैक्स जमा किया। कंपनी का कहना था कि पैकिंग सामग्री एक अलग वस्तु है।

2. मुख्य कानूनी सवाल

कोर्ट के सामने मुख्य सवाल यह था कि क्या सीमेंट की बिक्री के लिए इस्तेमाल होने वाली पैकिंग सामग्री को एक स्वतंत्र वस्तु माना जा सकता है जिस पर अलग से टैक्स लगे, या फिर यह सीमेंट की बिक्री का ही एक अभिन्न हिस्सा है जिस पर सीमेंट वाली दर से ही टैक्स लगना चाहिए?

3. कोर्ट का फैसला

पटना हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने कंपनी की दलीलों को खारिज कर दिया और विभाग के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने इसके लिए निम्नलिखित कारण दिए:

पहला कारण यह कि सीमेंट एक ऐसी वस्तु है जिसे बिना पैक किए बेचा नहीं जा सकता। पैकिंग सामग्री सीमेंट को ग्राहक तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए जरूरी है। इसलिए, पैकिंग सामग्री और सीमेंट के बीच का सौदा एक ही माना जाएगा।

दूसरा कारण यह कि जब कोई ग्राहक सीमेंट खरीदता है, तो उसका मकसद सिर्फ सीमेंट खरीदना होता है, न कि खाली बोरा। पैकिंग सामग्री उसमें अपने आप शामिल होती है। पैकिंग सामग्री को अलग से बेचने का कोई अलग समझौता नहीं था।

तीसरा कारण यह कि कोर्ट ने बिहार वित्त अधिनियम, 1981 की धारा 2(u) का हवाला दिया। इसके अनुसार, सामान की डिलीवरी के समय या उससे पहले किए गए किसी भी कार्य (जैसे पैकिंग) की लागत विक्रय मूल्य का हिस्सा मानी जाती है।

अंत में कोर्ट ने फैसला सुनाया कि पैकिंग सामग्री का टर्नओवर और सीमेंट का टर्नओवर एक ही माना जाएगा। इसलिए, पैकिंग सामग्री पर भी वही टैक्स लगेगा जो सीमेंट पर लगता है (यानी 11%)। इसे अलग करके कम टैक्स नहीं दिया जा सकता।

4. निष्कर्ष

यह फैसला उन सभी उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण है जो पैक्ड सामान बेचते हैं। यह स्पष्ट करता है कि अगर पैकिंग मुख्य उत्पाद की बिक्री के लिए जरूरी है, तो उसे ‘कम्पोजिट सप्लाई’ माना जाएगा और उस पर मुख्य उत्पाद का ही टैक्स लागू होगा।

वेबसाइट: livelawcompany.com

प्रस्तुतकर्ता: एडवोकेट सतीश लोधा

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